जीवन प्रभा: एक जीवंत अनुभव
ईश्वर की कृपा से मुझे ग्रामीण और शहरी, दोनों ही जीवन देखने का सौभाग्य मिला है। गरीबी और अमीरी को भी मैंने नज़दीक से देखा है। राजस्थान के विभिन्न जिलों में सेवा करते हुए, मैंने सामाजिक, सांस्कृतिक भेदभाव, सामाजिक रूढ़ियाँ, कुरीतियाँ और बेरोजगारी जैसे कई मुद्दों को गहराई से समझा। इन्हीं अनुभवों ने मुझे "जीवन प्रभा" लिखने के लिए प्रेरित किया।
मेरी आशा है कि यह पुस्तक जीवन में एक नई ज्योति जगाए और जन-जन में प्रकाश फैलाए। प्रकाशक के प्रति आभार: मैं ख्याति प्राप्त वी एन आर ग्रुप आफ पब्लिकेशन का हृदय से आभारी हूँ जिन्होंने मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान कर इस पुस्तक के प्रकाशन को संभव बनाया। मित्रों और प्रेरकों के प्रति आभार: मैं अपने उन विद्वान मित्रों का भी आभारी हूँ जिन्होंने मुझे इस पुस्तक को प्रकाशित करने के लिए प्रोत्साहित किया। विशेष रूप से, मैं शिक्षाविद् श्री मालीराम वर्मा जी, समाजसेवी श्री रामकिशोर राय जी, और स्वर्गीय श्री पूरणमल सुणिया जी का आभारी हूँ जिन्होंने मुझे लिखने क लिए प्रेरित किया और मेरे विचारों को पुस्तक का रूप देने के लिए आग्रह किया। मैं उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ।
"जीवन प्रभा" केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि जीवन के अनुभवों का एक जीवंत कोष है।
प्रेम सुधा का रस बरसाओ।
तुम जीवन को सुखी बनाओ।
अहंकार को तज कर मानव,
जीवन में सद् गुण अपनाओ।
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